तेरी छतरी के नीचे परिवार हमारा है

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे डुगरी वाले गुरु जी तेरा ही सहारा है,

तेरी छतरी के नीचे परिवार हमारा है,

मेरे प्यारे प्यारे गुरु जी तेरा ही सहारा है,

ओ डुगरी वाले गुरु जी तेरा ही सहारा है......

चरणों से मुझे लगाया, मुझको अपना लिया,

मेरा हर अवगुण मेरे सतगुर, दामन में छुपा लिया,

क़िस्मत बदल दी मेरी, किया एक इशारा है,

मेरे डुगरी वाले गुरु जी तेरा ही सहारा है......

मेरी सांस सांस में माला चले गुरु जी नाम की,

अब इधर उधर की बातें मेरे किस काम की,

मेरी हर इक सांस में माला चले गुरु जी नाम की,

अब इधर उधर की बातें मेरे किस काम की,

लखवार करूं शुकराना जीवन जो संवारा है,

मेरे डुगरी वाले गुरु जी तेरा ही सहारा है......

हर सुख दुख में गुरु जी तुम साथ निभाते हो,

हमसे जो गलती हो रस्ता दिखलाते हो,

सच्ची है प्रीत तुम्हारी झूठा जग सारा है,

मेरे प्यारे प्यारे गुरु जी तेरा ही सहारा है......

है आप ही का सब कुछ जो मेरे पास है,

टूटे ना आप से मेरा जो रिश्ता खास है,

भाया है "श्याम" के मन को बड़ा मंदिर प्यारा है,

मेरे डुगरी वाले गुरु जी तेरा ही सहारा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।