श्री राधे गोविंदा गोपाल राधावर माधव हरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री राधे गोविन्दा गोपाल, राधा वर माधव हरे ।

मोरमुकुट सिर पेच विराजे, कानन में कुण्डल छविछाजे ।

ठोड़ी पै हीरा लाल, राधा वर माधव हरे ॥१॥

बड़ी बड़ी अंखियन कजरा सोहे, लाल अधर लाली मन मोहे ।

गल वैजन्ती माल, राधा वर माधव हरे ॥२॥

मीठी मीठी वंशी बजावै, देखूं तो जियरा ललचावै।

बड़े गजब की चाल, राधा वर माधव हरे ॥३॥

यमुना किनारे कदमन छैया, श्याम चरावत डोलै गैया ।

संग सोहे ब्रज ग्वाल, राधा वर माधव हरे ॥४॥

सदा संग वषभानु दुलारी, श्रीराधा प्राणन ते प्यारी ।

रंग रंगीली बाल, राधा वर माधव हरे ॥५॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।