जब नाम मां का पुकारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( तेरे खजाने में मां कोई कमी नहीं है,

मुंह मांगा वर देकर झोली सबकी भरी है।। )

जिसने भी तड़प के जब नाम मां का पुकारा,

उसने ही पाया है मां का ये दर्शन प्यारा प्यारा,

जिसने भी तड़प के.....

आजा मां आजा...

मां तेरे दर पे आस लगाए बैठा हूं,

ममता की छैया में दुनियां सजाए बैठा हूं,

देखे तेरी मूरत का नैना मेरे नैना ये नजारा,

जिसने भी तड़प के जब नाम मां का पुकारा......

ध्यानु भगत को मां तुमने ही तारा था,

कितने असुरों को मां तुमने ही मारा था,

कितने ही भक्तो की नैया को लगाया है किनारा,

जिसने भी तड़प के जब नाम मां का पुकारा......

तरस रहे है नैन नैनो को कैसे समझाऊं,

तेरे दरस बिन द्वार से कैसे चला जाऊं,

ऐसा ना हो माता तू ना आए जमाना हंसे सारा,

जिसने भी तड़प के जब नाम मां का पुकारा......

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।