गौरा बोली भोले से ओ भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा बोली भोले से ओ भोले,

मेरे द्वारे नंदी पे चढ़के तू आ जईयो ओ भोले......

तु खुब बाराती ले आईयो ओ भोले,

मेरे बाप को ब्योंत भतेरो तू मत शरमईयो ओ भोले,

गौरा बोली भोले से ओ भोले,

मेरे द्वारे नंदी पे चढ़के तू आ जईयो ओ भोले......

तेरी बाट देखती पाऊंगी ओ भोले,

तु नाग हटाकर गले में माला डलवईया ओ भोले,

गौरा बोली भोले से ओ भोले,

मेरे द्वारे नंदी पे चढ़के तू आ जईयो ओ भोले......

मेरी सारी सखियां आएंगी ओ भोले,

तू द्वार रुकाई सबको अंगूठी दे जइयो ओ भोले,

गौरा बोली भोले से ओ भोले,

मेरे द्वारे नंदी पे चढ़के तू आ जईयो ओ भोले......

तुझे घुंघट में मैं देखूंगी ओ भोले,

तू आंख मिलाकर मीठा-मीठा मुसकईयो ओ भोले,

गौरा बोली भोले से ओ भोले,

मेरे द्वारे नंदी पे चढ़के तू आ जईयो ओ भोले......

जब फेरों पर मैं बैठूंगी ओ भोले,

मेरी मांग सजा कर मंगलसूत्र पहनईयो ओ भोले,

गौरा बोली भोले से ओ भोले,

मेरे द्वारे नंदी पे चढ़के तू आ जईयो ओ भोले......

तेरे सारे वचन निभाऊंगी ओ भोले,

मैं तेरी बन जाऊं तू मेरा बन जईयो ओ भोले,

गौरा बोली भोले से ओ भोले,

मेरे द्वारे नंदी पे चढ़के तू आ जईयो ओ भोले......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।