भोलेनाथ जी जोगी बनकर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोलेनाथ जी जोगी बनकर, सबको यही सिखाते है,

मोह माया में क्यों पड़े हो, मुझमे सब ही समाते है......

अंत समय आएगा साथ, मैली कर जायेगा,

राजा हो या रंक हो सब मेरी शरण में ही पाएगा,

धरा यही रह जायेगा जो तेरा मेरा गाते है,

मोह माया में क्यों पड़े हो, मुझमे सब ही समाते है......

जीवन मिला है तुझको प्यारे, जी भरके तू जी ले,

सब गम मिट जाए तेरे, भोले नाम की बूटी पी ले,

सन्यासी जीवन में बनके यही अलख जगाते है,

मोह माया में क्यों पड़े हो, मुझमे सब ही समाते है......

लाख बिगाड़े दुनिया चाहे, बिन मर्ज़ी कुछ ना बिगड़ेगा,

जिसपर हाथ भोले का हो हर मुश्किल से लड़ेगा,

"सागर" की जो उलझन बिगड़ी भोले ही तो बनाते है,

मोह माया में क्यों पड़े हो, मुझमे सब ही समाते है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।