ना घोटूँ भोले नाथ भाँग तेरी ना घोटूँ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ना घोटूँ ना घोटूँ भोले नाथ, भाँग तेरी ना घोटूँ......

रोज रोज का काम तुम्हारा,

दिल नहीं करता आज हमारा,

भोले आज हमारा भोले आज हमारा,

मेरे धुखन लागे हाथ भांग तेरी ना घोटु,

ना घोटूँ ना घोटूँ भोले नाथ, भाँग तेरी ना घोटूँ.....

दीन दुखी की खबर नहीं है,

कितनी भी पी लेओ सबर नही है,

भोले सबर नहीं है भोले सबर नहीं है,

तुम हो गए मस्त मलंग भाँग तेरी ना घोटूँ,

ना घोटूँ ना घोटूँ भोले नाथ, भाँग तेरी ना घोटूँ.....

सुनो नाथ भोले भंडारी,

सौतन बन गयी भांग हमारी,

भोले भांग हमारी भोले भांग हमारी,

मैं तो चली पिता के देश भाँग तेरी ना घोटूँ,

ना घोटूँ ना घोटूँ भोले नाथ, भाँग तेरी ना घोटूँ.....

सुनो गौरका प्रानन प्यारी,

भांग नहीं है तुमसे प्यारी,

गौरा तुमसे प्यारी, गौरा तुमसे प्यारी,

तुम रहो हमारे साथ, भांग मैं तो खुद घोटु.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।