माँ फूलो की फुलवारी मां ममता की क्यारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मां फूलो की फुलवारी,मां ममता की क्यारी,

मां पर मैं जाऊं वारी, मेरी मां को बलिहारी,

मां ही दया का है दरिया,

जग घूमिया मां जैसा न कोई जग घूमिया मां जैसा न कोई,

सारी दुनियां में मां जैसा न कोई.....

मां ही तो है मंदिर म्हारो, मां ही भगवान है,

मां के चरणो में म्हारो, जन्नत जहान है,

मां मेरे रब की रहमतों का दान है,

मां में ही दिखते मुझको सारे भगवान है,

मां प्यार की नदिया है, एक पल सौ सदियां है,

मां ममता की डलिया है, मां कमल की कलियां है,

मां ही दया का है दरिया, जग घूमियां मां जैसा न कोई,

सारी दुनियां में मां जैसा न कोई.....

सुबह शाम मां की सेवा, तीर्थ समान है,

गंगा की लहरे मां ही यमुना स्नान है,

सात सुरों की सरगम रागों का गान है,

हिमालय से ऊंची मां की दुवाओ का दान है,

तेरे सीने से लिपट जाऊं, छोटा बच्चा बन जाऊं,

तू लोरी सुनाए मुझे, तेरी गोद में सो जाऊं,

मां ही दया का है दरिया,जग घूमियां मां जैसा न कोई।

मां ही दया का है दरिया, जग घूमियां मां जैसा न कोई,

सारी दुनियां में मां जैसा न कोई.....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।