दर्शन के अमृत को साईं

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन के अमृत को साईं प्यासा मनवा तरस रहा,

दर्शन दो साईं नाथ मोहे जन्मो से जेइया तरस रहा,

बारहा साल तपयासा की नी पूरण सतगुरु पाया,

त्याग वैराग की मूरत साईं खंडोबा जी फ़रमाया,

तीनो लोको पर है साईं प्यार तुम्हारा बरस रहा,

दर्शन दो साईं नाथ मोहे जन्मो से जीया तरस रहा,

सोला साल की तरुण अवस्था बवसागर को जी ता,

नूर इलाही मुखडे पर था भगतो का मन जी ता,

शिर्डी में तब से साईं प्रेम नजारा बरस रहा,

दर्शन दो साईं नाथ मोहे जन्मो से जीया तरस रहा,

सबका मालिक एक बताया भेद भाव को मिटाया,

ईद दिवाली के उस्तव को मिल जुल साथ मनाया,

हिन्दू मुशिल्म सब पर ही रहमत का सहारा बरस रहा,

दर्शन दो साईं नाथ मोहे जन्मो से जीया तरस रहा,

रणजीत राजा भी साईं देवा भजन तुम्हारे गावे,

नाम खुमारी में मत वाला सबको साथ नचाये,

प्रेम की इसी लोह है लगी अंखियो से पानी बरस रहा,

दर्शन दो साईं नाथ मोहे जन्मो से जीया तरस रहा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।