भोले सावन में आना तुम झूम झूम के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले सावन में आना तुम झूम झूम के,

झूम झूम के भोले नाच नाच के,

तेरे मंदिर में जयकारा गूंजे बम बम भोले....

सिर का श्रंगार भोले जुड़े से होगा,

गंगा बहाना भोले झूम झूम के,

भोले सावन में आना.....

माथे का श्रंगार भोले चंदन से होगा,

चंदा चमकाना भोले झूम झूम के,

भोले सावन में आना.....

गले का श्रंगार मुंडमाला से होगा,

नाग लहराना भोले झूम झूम के,

भोले सावन में आना.....

हाथों का श्रंगार भोले त्रिशूल से होगा,

डमरु बजाना जरा झूम झूम के,

भोले सावन में आना.....

तन का श्रंगार बाघ अंबर से होगा,

बसमी रामाना होली झूम झूम के,

भोले सावन में आना.....

पैरों का सिंगार भोले घुंघरू से होगा,

नंदी पर बैठ आना भूले झूम झूम के,

भोले सावन में आना.....

आप भी आना साथ गौरा जी को लाना,

गणपत को लाना गोदी में बिठा के,

भोले सावन में आना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।