मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

मेरे हाथ में लोटा गंगाजल ओ भोले,

मैं किस विधि तुम्हें धुलाऊं के कांधे कावड़ है ओ भोले,

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

मेरे हाथ कटोरी चंदन की ओ भोले,

मैं किस विधि तिलक लगाऊं के कावड़ कांधे पर ओ भोले,

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

मेरे हाथ छाबड़िया फूलों की ओ भोले,

मैं किस विधि हार पहनाऊ के कावड़ कांधे पे ओ भोले,

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

मेरे हाथ कटोरा खीर का ओ भोले,

मैं किसी बिधी भोग लगाऊ के कांधे कावड़ है ओ भोले,

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

मेरे हाथ पितांबर लाई हूं ओ भोले,

मैं किसी बिधी तुम्हें उढाऊं के कांधे कांवर है ओ भोले,

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

मेरे हाथ धतूरा बेल पाती ओ भोले,

मैं किसी बिधी तुम्हें चढ़ाऊं के कांधे कांवर है ओ भोले,

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

मेरे हाथ में ढोलक चिमटा है ओ भोले,

मैं किसी बिधी भजन सुनाऊं के कांधे कावड़ है ओ भोले,

मैं किस बिधि तुम्हें मनाऊं कावड़ ले आई ओ भोले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।