कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे,

मेरे वस च नही जज्बात.....

कुंज गली विच नचदी सी मेरे गले विच पाया ढोल सी,

राधा नाम मैं गा रही थी मेरे सतगुरु मेरे कोल सी,

कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे.....

ओ तेरियां ही गल्ला करदी सी वे मैं करदी करदी रो पई,

सुध बुध मेनू भूल गई वे श्यामा याद तेरी दे विच सो गई,

कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे.....

वृन्दावन मेरी झोपड़ी श्यामा आसे पासे संत वे,

पीला पितांबर वेखया ते भूल गई सारे ग्रंथ वे,

कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे.....

यमुना जि ठा ठा मारदी ते कोले ईक कदम दा पेड़ वे,

तिरछी चितवन वेख के श्यामा छूटे चौरासी गेड़े वे,

कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे.....

हथ तेरे दे विच बांसुरी वे श्यामा गल बैजंती माला वे,

मोर मुकट तो जान गई श्यामा ए ता दिल दिया जानन वाला वे,

कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे.....

जद मुरली विच फुकेया वे श्यामा रस बुल्लिया चो डुल पया,

दोहि बुन्दा पितिया सि ते सुपना मेरा खुल गया वे,

कल राती सुपने च होई मुलाक़ात वे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।