हे भोले नाथ दया करके अब मुझे बसा लो चरणन में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – श्यामा आन बसों वृन्दावन में

हे भोले नाथ दया करके,

अब मुझे बसा लो चरणन में,

हे भोले नाथ दया कर के,

अब मुझे बसा लो चरणन में.....

फल फुल की थाली लायी हूँ,

चरणों में तुम्हरे आयी हूँ,

तुम्हे अपने बसाकर नैनन में,

अब मुझे बसा लो चरणन में,

हे भोले नाथ दया कर के,

अब मुझे बसा लो चरणन में.......

बेल पात की थाली लायी हूँ,

दर्शन को तुम्हारे आई हूँ,

तुम्हे देख लूँ मन के दर्पण में,

अब मुझे बसा लो चरणन में,

हे भोले नाथ दया कर के,

अब मुझे बसा लो चरणन में.......

मैं भंग धतूरा लायी हूँ,

मैं दर दर की ठुकराई हूँ,

मुझे दे दो शरण बस चरणन में,

अब मुझे बसा लो चरणन में,

हे भोले नाथ दया कर के,

अब मुझे बसा लो चरणन में.......

तेरा नाम का सुमिरन करती हूँ,

यही रो रो कर बस कहती हूँ,

तेरे दर्श की प्यास है अखियन में,

अब मुझे बसा लो चरणन में,

हे भोले नाथ दया कर के,

अब मुझे बसा लो चरणन में.......

तेरा प्रेम हमारी पूजा है,

कोई और ना मन में दूजा है,

तुम छिपे हो मन के बगियन में,

अब मुझे बसा लो चरणन में,

हे भोले नाथ दया कर के,

अब मुझे बसा लो चरणन में.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।