शिव की बारात आई है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – आज मेरे यार की शादी

शिव की बारात आई है,

शिव की बारात आयी है,

रात आई है,

लेके सौगात आई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है,

सजी धजी भूतो प्रेतों के,

साथ आई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है......

हर तरफ अजब नजारा,

सहमा माहौल है सारा,

डर से सब लोग डरे है,

छतो पे जा के चढ़े है,

बच्चे बूढ़े जो बड़े है,

एक चर्चा ये करे है,

कैसा दूल्हा ये आया,

कैसी बारात ये लाया,

मुस्काते चेहरों पे,

एक दहशत सी छाई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है......

भंग का रंग चढ़ा है,

गले में सर्प पड़ा है,

पहने बिच्छू का बाला,

सदाशिव डमरू वाला,

बैल की करके सवारी,

आए अपने ससुरारी,

हस रहे सभी देवता,

जय हो भोला भंडारी,

चारों दिशा में एक ही चर्चा,

पड़ी सुनाई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है......

साथ में अजब है साथी,

आए बनके है बाराती,

है कोई सुन्दर चंगा,

और कोई बिलकुल नंगा,

चुड़ैले करती हल्ला,

पहन के उल्टा पल्ला,

बज रही ढोलक ढम ढम,

साथ संगीत की सरगम,

कहीं सुलगती चिलम,

कहीं छनती ठंडाई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है......

देखि बारात जो मैना,

बोली नारद से बैना,

बेटी की है बर्बादी,

ये नहीं होगी शादी,

शिव की देखि जो माया,

राज सारा है बताया,

हो गई राजी मैना,

गौरा को शिव से मिलाया,

विधि विधान से मंडप में,

भावर बिरवाई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है......

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आई है,

रात आई है,

लेके सौगात आई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है,

सजी धजी भूतो प्रेतों के,

साथ आई है,

शिव की बारात आयी है,

शिव की बारात आयी है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।