आओ मिलकर गाये महिमा हम कालो के काल की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( आदिदेव महादेव का,

जो करते है गुणगान,

जनम मरण का उनको निज ही,

हो जाता सब ज्ञान,

काल से रक्षा करते,

शिवजी काटे सब जंजाल,

हरपल भजते रहो रे भक्तो,

जय जय जय महाकाल॥ )

आओ मिलकर गाये महिमा,

हम कालो के काल की,

जय बोलो महाकाल की जय बोलो,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो,

दसो दिशाओ में होती,

जयकार यहाँ महाकाल की,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो.....

इस जग के है कर्ता धर्ता,

आदिदेव शिवशंकर,

शिवशंकर से रचा बसा है,

इस धरती का कण कण,

ब्रम्हा बनकर रचते जग को,

विष्णु बन पालन करते है,

शिव बनकर हर लेते माया,

इक्छा है कल्याण की,

जय बोलो महाकाल की जय बोलो......

अवंतिका नगरी में है प्रभु,

शिवशंकर का वास,

महाकाल के रूप में शिवजी,

करते यहाँ निवास,

पूण्य सलिला क्षिप्रा तट पर,

शिवजी बैठे ध्यान लगाकर,

माया अपरंपार है,

इन मायापति महाकाल की,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो......

कुम्भ पर्व पर क्षिप्रा में,

स्नान पूण्य दायी है,

क्षिप्रा और महाकाल की महिमा,

ऋषि मुनियो ने गायी है,

यह अवसर भक्तो मत छोड़ो,

महाकाल से नाता जोड़ो,

बड़े भाग्य से मिलती है ये,

भक्ति इन महाकाल की,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो.....

महाकुम्भ में महाकाल के,

दर्शन जो करते है,

उन भक्तो के देखो भोले,

पाप शाप हरते है,

जो नित पूजन अर्चन करते,

महाकाल का नाम जो रटते,

जनम जनम तीर जाये जिसपर,

कृपा बने महाकाल की,

जय बोलो महाकाल की जय बोलो......

आओ मिलकर गाये महिमा,

हम कालो के काल की,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो,

दसो दिशाओ में होती,

जयकार यहाँ महाकाल की,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो,

जय बोलो महांकाल की जय बोलो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।