माँगते रहते तुझसे सांझ सवेरे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – तेरे मस्त मस्त दो नैन

माँगते रहते तुझसे सांझ सवेरे,

हाथ ये फेले रहते सामने तेरे,

हाथ ये फेले रहते सामने तेरे,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता.....

याद वो दिन मुझे,

खाली जेब वो मेरा,

दर दर भटकना हाए,

दर दर भटकना,

याद वो दिन मुझे,

खाली जेब वो मेरा,

दर दर भटकना हाए,

दर दर भटकना,

गैरो की क्या कहूं,

अपनो की आँख में,

रह रह खटकना हाए,

रह रह खटकना,

चारो तरफ थे मेरे,

गम के अंधेरे,

आख़िर में आया बाबा,

द्वार पे तेरे,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता......

मेरी ग़रीबी के,

दिन थे वो कैसे,

तूने ही जाना बाबा,

तूने ही जाना,

मेरी ग़रीबी के,

दिन थे वो कैसे,

तूने ही जाना बाबा,

तूने ही जाना,

तेरी कृपा से परिवार खा रहा,

भर पेट खाना बाबा,

देने को कुछ भी बाबा,

पास ना मेरे,

दबा जा रहा हू बाबा,

कर्ज में तेरे,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता......

माँगना छोड़ दूँ,

मुमकिन नही मेरा,

आदत ना जाए मेरी,

आदत ना जाए,

माँगना छोड़ दूँ,

मुमकिन नही मेरा,

आदत ना जाए मेरी,

आदत ना जाए,

तेरे आगे भोले,

कहता ‘पवन’ मुझे,

लाज ना आए बाबा,

लाज ना आए,

तभी तो मै आता बाबा,

सांझ सवेरे,

सदा हाथ फैले रहते,

सामने तेरे,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता......

माँगते रहते तुझसे सांझ सवेरे,

हाथ ये फेले रहते सामने तेरे,

हाथ ये फेले रहते सामने तेरे,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया दाता,

तूने खूब दिया दाता,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तेरा बहुत बड़ा उपकार,

तूने खूब दिया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।