तेरी कृपा ही मेरा सब कुछ

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी कृपा ही मेरा सब कुछ,

ओ मेरे सतगुरू प्‍यारे,

मुझे नहीं चाहिए अब कुछ,

ओ मेरे सतगुरू प्‍यारे,

गैरो की बात करे क्‍या,

हमें अपनो ने ठुकराया,

बन गया नाथ तू मेरा,

तूने पल पल साथ निभाया,

तेरा साथ ही मेरा सब कुछ,

ओ मेरे सतगुरू प्‍यारे.....

मैया बनकर के तूने,

मुझे गोद मे ले दुलराया,

बन गया पिता तू मेरा,

तूने चलना मुझे सिखाया,

तेरा प्‍यार ही मेरा सब कुछ,

ओ मेरे सतगुरू प्‍यारे.....

मै किसी से कुछ क्‍या मांगू,

बिन मांगे ही सब पाऊँ,

जब द्वार मिला बाबा तेरा,

मै किसी के दर क्‍यू जाऊँ,

तेरा द्वार ही मेरा सब कुछ,

ओ मेरे सतगरू प्‍यारे.....

इतनी किरपा की तूने,

ये मुख से कहा ना जाये,

जब जब मै याद करू तो,

मेरा हृदय भर भर आये,

ये दास कहे अब क्‍या कुछ,

ओ मेरे सतगुरू प्‍यारे,

तेरी कृपा ही मेरा सब कुछ,

ओ मेरे सतगुरू प्‍यारे।

मुझे नहीं चाहिए अब कुछ,

ओ मेरे सतगुरू प्‍यारे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।