जा रे जा जा रे बदरा तू कान्हा के अंगना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जा.. रे जा जा रे बदरा तू कान्हा के अंगना,

तुझसे बोले ये राधा, किया कान्हा ने वादा,

खड़ी यमुना किनारे, राधा बाट निहारें,

आने को कह गए काहे न आए जाके तू श्याम को लारे,

जा..रे जा जा रे बदरा.....

फूल ये कलिया बिरज की गलियां, हंसती है मुझपे,

हंसे जमाना हवा भी ताना, कसती है मुझ्पे,

दिन भी ढला शाम आई टूटी ना ये आशा,

तेरे मिलन को कान्हा, मन मेरा प्यासा,

कान्हा से कहना बोले ये राधा, आजा दरस दिखलारे,

जा..रे जा जा रे बदरा.....

कान्हा के बिन कटते ना दिन कैसे समझाऊं,

बाते मन की प्रीत लगन की केह नहीं पाऊं,

दोनो जहां को भूली, भोली राधा रानी,

कान्हा कान्हा रटे है ये पगली दीवानी,

मेरा संदेशा जा पहुंचाना चैन ह्रदय का आरे।।

जा..रे जा जा रे बदरा.....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।