भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है,

भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है,

भक्तों का पार बेड़ा, हाथों हाथ कर रहा,

भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है.....

माया में फस के जो भी दुखड़े उठा रहे हैं,

दुखड़े मिटा के सुख की, बरसात कर रहा है,

भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है.....

बर्बाद हो गए हैं बर्बादियों के चलते,

उनको नचा नचा कर, आबाद कर रहा है,

भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है.....

कहता अनाड़ी जब भी बजता है शिव का डमरू,

समझों खुशी की पैदा, हालात कर रहा है,

भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।