जटा में तेरी गंगा विराजे माथे चन्द्र सजाया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( दुखियों के सब दुःख हर लेते हैं,

भस्म लपेटे रहते हैं,

कष्ट उन्हें क्या जो भोले की,

शरण में हरपल रहते हैं॥ )

जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चन्द्र सजाया,

जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चन्द्र सजाया,

सावन में जब डमरू बाजे, तीनो लोक सुहाया,

आया सावन आया, भोले का सावन आया,

आया सावन आया, बाबा का सावन आया ||

जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चन्द्र सजाया,

जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चन्द्र सजाया,

सावन में जब डमरू बाजे, तीनो लोक सुहाया,

आया सावन आया, भोले का सावन आया,

आया सावन आया, बाबा का सावन आया ||

तेरी महिमा हम क्या बताएं, मंदिर खुद हैं बताते,

मानव क्या सावन में तुझसे, देव भी मिलने आते |

तेरी महिमा हम क्या बताएं, मंदिर खुद हैं बताते,

मानव क्या सावन में तुझसे, देव भी मिलने आते |

हम हैं दुखारी हम क्या लाये, बेलपत्र है लाया,

हम हैं दुखारी हम क्या लाये, बेलपत्र है लाया,

सावन में जब डमरू बाजे, तीनो लोक सुहाया ||

आया सावन आया, भोले का सावन आया,

आया सावन आया, बाबा का सावन आया ||

मैया पार्वती है शक्ति, विघ्न के हर्ता गणेश,

सेनापति हो मुरगन जैसा, फिर कैसे हो कलेश ||

मैया पार्वती है शक्ति, विघ्न के हर्ता गणेश,

सेनापति हो मुरगन जैसा, फिर कैसे हो कलेश ||

यही सोंचकर सुन मेरे दाता, याचक दर पर आया,

यही सोंचकर सुन मेरे दाता, याचक दर पर आया ||

सावन में जब डमरू बाजे, तीनो लोक सुहाया ||

आया सावन आया, भोले का सावन आया,

आया सावन आया, बाबा का सावन आया ||

छटा अनूपम है सावन की, कांवरिया हैं बताते,

लेकिन जब तक तू न चाहे, हम तो नही जा पाते ||

छटा अनूपम है सावन की, कांवरिया हैं बताते,

लेकिन जब तक तू न चाहे, हम तो नही जा पाते ||

भाग्य देख संयोग का बाबा, तेरे रंग में नहाया,

भाग्य देख संयोग का बाबा, तेरे रंग में नहाया ||

सावन में जब डमरू बाजे, तीनो लोक सुहाया ||

आया सावन आया, भोले का सावन आया,

आया सावन आया, बाबा का सावन आया ||

जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चन्द्र सजाया,

जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चन्द्र सजाया,

सावन में जब डमरू बाजे, तीनो लोक सुहाया ||

आया सावन आया, भोले का सावन आया,

आया सावन आया, बाबा का सावन आया ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।