ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर मेरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर मेरी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर मेरी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न,

हनुमत मेरी चुनर में,

चित्रकूट के घाट पे ओढ़ूँ,

दाग ना लागे गुरुदेव,

चुनर मेरी ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर म्हारी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

गोकुल मथुरा वृन्दावन और,

बरसाना मेरी चुनर में,

यमुना जी के घाट पे ओढ़ूँ,

दाग ना लागे गुरुदेव,

चुनर मेरी ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर म्हारी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

चंदा सूरज नवलख तारा,

रंग दो मेरी चुनर में,

गगन मण्डल के बिच में ओढ़ूँ,

दाग ना लागे गुरुदेव,

चुनर मेरी ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर म्हारी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

कृष्ण कन्हैया ग्वाल बाल,

संग राधा जी मेरी चुनर में,

रास मण्डल के बिच में ओढ़ूँ,

दाग ना लागे गुरुदेव,

चुनर मेरी ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर म्हारी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

गंगा जमुना सरस्वती और,

क्षिप्रा मेरी चुनर में,

महाँकाल दरबार में ओढ़ूँ,

दाग ना लागे गुरुदेव,

चुनर मेरी ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर मेरी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर मेरी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

ऐसी रंगो गुरुदेव चुनर म्हारी,

ऐसी रंगो गुरुदेव,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।