शरण में हम तुम्हारे आ पड़े है

लखबीर सिंह लक्खा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शरण में हम तुम्हारे आ पड़े है,

ओ भोले तेरे द्वारे आ पड़े है,

शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं,

ओ बाबा तेरे द्वारे आ पड़े है.......

भगत के दिल को यूँ ना तोड़ देना

निराशा कर प्रभु ना छोड़ देना,

बहुत ही गम के मारे आ पड़े है,

शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं,

ओ बाबा तेरे द्वारे आ पड़े है......

हमें भी अपनी सेवा में लगा लो,

चरण का अपने सेवक तुम बना लो,

जगत से बेसहारे आ पड़े है,

शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं,

ओ बाबा तेरे द्वारे आ पड़े है......

फसी है नाव ‘शर्मा’ की निकालो,

सहारा देके ‘लक्खा’ को बचा लो,

लो झोली को पसारे आ पड़े है,

शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं,

ओ बाबा तेरे द्वारे आ पड़े है......

शरण में हम तुम्हारे आ पड़े है,

ओ भोले तेरे द्वारे आ पड़े है,

शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं,

ओ बाबा तेरे द्वारे आ पड़े है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।