दीवानों फूल बरसाओ मेरे महाकाल आए है

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दीवानों फूल बरसाओ,

मेरे महाकाल आए है,

मेरे महाकाल आए हैं,

दीवानों आरती गाओ,

मेरे महाकाल आए हैं......

गले में नाग की माला,

है ओढ़े हुए है मृगछाला,

नहाए हुए है भस्मी से,

जटा में गंग की धारा

बजे करताल डमरू की,

मेरे महाकाल आए हैं,

मेरे महाकाल आए हैं,

दीवानों फूल बरसाओ,

मेरे महाकाल आए हैं,

मेरे महाकाल आए हैं......

खड़ी है प्रजा ये चौखट पर,

खड़े देवी देवता सारे,

चली भूत-प्रेत की टोली,

चले नंदीनाथ मस्ता कर,

सजी है गौरा महारानी,

मेरे महाकाल आए हैं,

मेरे महाकाल आए हैं,

दीवानों फूल बरसाओ,

मेरे महाकाल आए हैं,

मेरे महाकाल आए हैं.....

चौसठ योगिनी बावन भैरव,

असुर नाग किन्नर के है स्वामी,

खड़ी बारात द्वारे पे,

आई मैया हरसिद्धि महारानी,

गाई बारात ‘बिट्टू’ ने,

मेरे महाकाल आए हैं,

मेरे महाकाल आए हैं,

दीवानों फूल बरसाओ,

मेरे महाकाल आए हैं,

मेरे महाकाल आए हैं.......

दीवानों फूल बरसाओ,

मेरे महाकाल आए है,

मेरे महाकाल आए हैं,

दीवानों आरती गाओ,

मेरे महाकाल आए हैं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।