दर छोड़ के जाउंगा ना मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ दर छोड़ के जाउंगा ना मैया कभी तो नैया पार करोगी,

ओ दर छोड़ के जाऊंगा ना मैया कभी तो नैया पार करोगी.......

जैसे औरों के किये हैं दुख दूर मां,

आस पूरी होगी मेरी भी जरूर मां,

जैसे औरों के किये हैं दुख दूर मां,

आस पूरी होगी मेरी भी जरूर मां,

हो मेरे सपने भी,,

हो मेरे सपने भी होके दयालु मां तुम्ही सच करोगी,

ओ दर छोड़ के जाऊंगा ना मैया......

जो भी लेना मैंने लेना तेरे द्वार से,

तेरे होते क्यों मैं मांगू संसार से,

जो भी लेना मैंने लेना तेरे द्वार से,

तेरे होते क्यों मैं मांगू संसार से,

हो जब किसी दिन,,

हो जब किसी दिन रहम तुझे आया, निराला उपकार करोगी,

ओ दर छोड़ के जाऊंगा ना मैया......

दूर भक्तों से मैया रह ना पाओगी,

आज दुखी हो तो कल मान जाओगी,

दूर भक्तों से मैया रह ना पाओगी,

आज दुखी हो तो कल मान जाओगी,

हो सारी रहमतों,,

हो सारी रहमतों को मौज में आके मां मुझपे निसार करोगी,

ओ दर छोड़ के जाऊंगा ना मैया......

काम होता है सवाली का पुकारना,

काम तेरा है मां किस्मतें संवारना,

काम होता है सवाली का पुकारना,

काम तेरा है मां किस्मतें संवारना,

हो मैंने जिद कर,,

हो मैंने जिद कर झोली जो पसारी तो कैसे इंकार करोगी,

ओ दर छोड़ के जाऊंगा ना मैया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।