मेरे मन नू गुरुजी समझायों

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन नू गुरुजी समझायों,

मेरे आखे नहियो लगदा,

नहियो लगदा हारा वालेया,

मेरे आखे नहियो लगदा....

अमृत वेले ए नहियो उठदा,

ले ले रजाई मुह पेया तकदा,

ए ता सो सो के नहियो रजदा,

मेरे आखे नहियो लगदा,

मेरे मन नू गुरुजी समझायों........

सत्संग दे वल ए नहियो जांदा,

घर घर दिया ए खबरा ले आंदा,

ए चुगली करन तो ना डरदा,

मेरे आखे नहियो लगदा,

मेरे मन नू गुरुजी समझायों........

बर्गर पिज़्ज़ा खाने नू मांगदा,

बर्फी दे दाने भर भर मांगदा,

ए ता खा खा के नहियो रजदा,

मेरे आखे नहियो लगदा,

मेरे मन नू गुरुजी समझायों........

सिमरन करने नू ए नहियो बेहंदा,

भज भज के ए बाहर नू जांदा,

ए ता भजन करन तो डरदा,

मेरे आखे नहियो लगदा,

मेरे मन नू गुरुजी समझायों........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।