भजन करो जी मेरी सासू जी

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॥ पावन पाठ ॥

भजन करो जी राजी, राजी मेरी सासू जी....

गीता पढ़ने की कहू तो आंख दुखत है,

इत उत झांकने को बड़ी राजी मेरी सासू जी....

सत्संग सुनने की कहूं तो कान दुखत है,

बुराई सुमन को बड़ी राजी मेरी सासू जी......

दान करने की कहूं तो हाथ दुखत हैं,

रुपया गिनने को बड़ी राजी मेरी सासू जी......

तीरथ करने की कहूं तो पैर दुखत हैं,

घर-घर घूमने को बड़ी राजी मेरी सासू जी......

भजन करने की कहूं तो मुखड़ा दुखत है,

बुराई करने को बड़ी राजी मेरी सासू जी.....

मंदिर जाने की कहूं तो टाइम नहीं है,

फोन देखन को बड़ी राजी मेरी सासू जी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।