वह कभी ना हारे जो भोले की कावड़ उठाता

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जटा में गंगा और माथे पे चांद,

पर्वत पर बैठा वह पीता है भांग,

भोला भंडारी है महादेव मेरा,

योगी त्रिपुरारी है महादेव मेरा.....

कर भजन तू उसका जो भक्तों की बिगड़ी बनाता,

वह कभी ना हारे जो भोले की कावड़ उठाता,

निरबल का साथी है, सच्चा हितकारी है, महादेव मेरा.....

क्या धारा क्या अंबर सारे करते हैं तेरी गुलामी,

हर दिशा के प्राणी भोले शंकर जी हैं सबके स्वामी,

पार करे वो नैया बड़ा उपकारी है, महादेव मेरा.....

जो गगन के तारे और भानू करे तेरी पूजा,

मान ले रे मनवा नहीं भोले सा हैं कोई दूजा,

पार करे वो नैया बड़ा उपकारी है, महादेव मेरा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।