मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डार दई

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डार दई....

काहे की तूने नाव बनाई काहे की पतवार,

रामा काहे की लगा दई झंझीर, सागर में नैया डार दई,

राम नाम की नाव बनाई भक्ति की पतवार,

यामें ज्ञान की लगा दी जंजीर सागर में नैया डार दई.....

कौन सखिया बैठन हारी कौन है खेवनहार,

रामा कौन लगावे बेड़ा पार, सागर में नैया डार दई,

सीता माता बैठन हारी लक्ष्मण खेवनहार,

राहें राम लगावे बेड़ा पार सागर में नैया डार दई.....

तुलसी दास आश रघुवर की चरणों में बलिहार,

मेरे बालाजी को पूजे संसार सागर में नैया डार दई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।