मैं तां तेरे कोलो महारानी कई होर भी कम कराने ने

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो तेरे कोलो महारानी, कई होर भी कम कराने ने,

जो किते मेहरबानी ऐ, पर ओ ता सब पुराने ने,

मैं तो तेरे कोलो महारानी, कई होर भी कम कराने ने,

जो किते मेहरबानी ऐ, पर ओ ता सब पुराने ने......

मुश्किल से मुश्किल आंदी गई, तू नालों नाल मिटांदी गई,

मैनु आस बड़ी मां तेरे ते, मेरे दिन चंगे मां आने ने,

मैं तो तेरे कोलो महारानी.....

हर वेले लाज बचाई तू, हर ओखे वेले आई तू,

मैं तेरा द्वारा छोड़ना नई, अजे अव्गुण कई बक्शाने ने,

मैं तो तेरे कोलो महारानी.....

जो करना तुइयो करना ऐ, मेरा हर संकट मां हरना ऐ,

दरशी ने आके दर तेरे, दुःख अजे भी कई सुनाने ने,

मैं तां तेरे कोलो महारानी.....

मैं किसे नाल भी घुलया नई, पर तैनू कदे मां भूल्या नई,

तु मेरी है मैं तेरा हां, तु मेरे भाग जगाने ने,

मैं तां तेरे कोलो महारानी कई होर भी कम कराने ने......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।