म्हारो श्याम बसे खाटु माहि सालासर में बजरंगी

लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी भजन खाटू श्याम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

( रंग रंगीले राजस्थान में,

देखे अजब नज़ारे,

कण कण में यहाँ आन बसे है,

इस धरती पर देव हमारे,

अपनी अपनी शोभा सबकी,

अपनी अपनी महिमा है,

कुदरत ने कर दिया यहाँ पर,

देखो अजब करिश्मा है॥ )

म्हारो श्याम बसे खाटु माहि,

सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि.....

हे गौरी सूत देव गजानन,

देवारा सिरमौर है,

देवारा सिरमौर है,

मरुधर में धाम बणायो,

प्यारो रणथंबोर है,

प्यारो रणथंबोर है,

ओ भक्तो रे,

मरुधर में धाम बणायो,

प्यारो रणथंबोर है,

गणपति ने पूजे दुनिया घर घर माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटु माहि,

सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि......

ओ सावलींयो सेठ पियारो,

मण्डफिया विराजे है,

मण्डफिया विराजे है,

नाथद्वारा श्रीनाथ को,

मंदिर यो साजे है,

मंदिर यो साजे है,

लो देखो रे,

नाथद्वारा श्रीनाथ को,

मंदिर यो साजे है,

भक्ता रा काज सवारे संकटये माए,

म्हारो श्याम बसे खाटु माहि,

सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि.......

परबत पे शाकम्बरी माँ,

गोरिया में जिण धाम,

गोरिया में जिण धाम,

दो जाटी बालाजी को,

प्यारो सो एक धाम,

प्यारो सो एक धाम,

ओ भक्तो रे,

दो जाटी बालाजी को,

प्यारो सो एक धाम,

अंजनी माँ को लाल बिराजे मेहंदीपुर माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटु माहि,

सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि......

रुणिचे रामदेवजी,

पीरा को पीर है,

पीरा को पीर है,

पूनरासर में बजरंगी,

वीरा को वीर है,

वीरा को वीर है,

ओ सुण जो रे,

पूनरासर में बजरंगी,

वीरा को वीर है,

करणी माता दर्शन देवे बीकानेर माए,

म्हारो श्याम बसे खाटु माहि,

सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि......

गलता जी पूण्य तीरथ है,

पुष्कर में ब्रम्हा धाम,

पुष्कर में ब्रम्हा धाम,

प्यारी प्यारी राधा सागे,

जयपुर में राधेश्याम,

जयपुर में राधेश्याम,

ओ श्याम रे,

प्यारी प्यारी राधा सागे,

जयपुर में राधेश्याम,

निशदिन रास रचावे बालू रेत माए,

म्हारो श्याम बसे खाटु माहि,

सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि.......

धोरा री धरती माहि,

सतियो का राज है,

सतियो का राज है,

राणी सती ढांढण सती,

राखे माँ लाज है,

राखे माँ लाज है,

ओ दादी जी,

खेमी सती धोलीं सती,

राखे माँ लाज है,

हर्ष देवी देव बिराजे राजस्थान माए,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि,

सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।