टूट गयी है माला मोती बिखर चले

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॥ पावन पाठ ॥

टूट गयी है माला,

मोती बिखर चले,

दो दिन रह कर साथ,

जाने किधर चले.....

मिलन की दुनिया छोड़ चले यह,

आज बिरह मे सपने,

मिलन की दुनिया छोड़ चले यह

आज बिरह मे सपने,

खोए खोए नैनों मे हैं,

उजड़े उजड़े सपने,

उजड़े उजड़े सपने,

याद की गठरी लिए,

झुकाए नज़र चले,

दो दिन रह कर साथ,

जाने किधर चले.....

अब तो यह जग मे जियेंगे,

आँसू पीते पीते,

अब तो यह जग मे जियेंगे,

आँसू पीते पीते,

जैसी इनपे बीती वैसी,

और किसी पे ना बीते,

और किसी पे ना बीते,

कोई मत पूछो इन्हें लिए,

किस डगर चले,

दो दिन रह कर साथ,

जाने किधर चले.....

टूट गयी है माला,

मोती बिखर चले,

दो दिन रह कर साथ,

जाने किधर चले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।