ईश्वर को जान बंदे मालिक तेरा वही है

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॥ पावन पाठ ॥

ईश्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है,

करले तू याद दिल से,

हर जाम वो सही है,

ईष्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है......

भूमि अगन पवन में,

सागर पहाड़ बन में,

उसकी सभी भुवन में,

छाया समा रही है,

ईष्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है......

उसने तुझे बनाया,

जब खेल ये दिखाया,

तू क्यों फिरे भुलाया,

उमरा बिता रही है,

ईश्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है......

विषयो की छोड़ आशा,

सब झुटे है तमाशा,

हैरान हु में खुद भी,

अब माया फसा रही है,

ईष्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है......

दुनिया से दिल हटाले,

प्रभु ध्यान में लगा ले,

ब्रम्हानंद मोक्ष पा ले,

कल का पता नही है,

ईश्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है......

ईष्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है,

करले तू याद दिल से,

हर जाम वो सही है,

ईष्वर को जान बन्दे,

मालिक तेरा वही है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।