जाग जाग मेरी गंगा माई

मीरा बाई
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया दर्शन आयी जी,

दुनिया दर्शन आयी जी,

जाग जाग मेरी गंगा माई,

जाग जाग मेरी गंगा माईं,

दुनिया दर्शन आयी जी,

जाग जाग मेरी गंगा माईं......

राम जागे लक्ष्मण जी जागे,

ओ जागी सीता माई जी,

जागी सीता माई जी,

हाक देत हनुमंत जागे,

हाक देत हनुमंत जागे,

जागे चारो भाई जी,

जाग जाग मेरी गंगा माईं......

ब्रम्हा जागे विष्णु जागे,

ओ जागे शंकर देवा जी,

जागे शंकर देवा जी,

बडे बडे जोगी सब जागे,

बडे बडे सब जोगी जागे,

सूरत भजन मे लागी जी,

जाग जाग मेरी गंगा माईं.......

ध्रुव जागे प्रहलाद भी जागे,

ओ जागे सज्जन कसाई जी,

जागे सज्जन कसाई जी,

अरे सुआ पढावत कनिका जागी,

सुआ पढावत कनिका जागी,

जागी मीरा बाई जी,

जाग जाग मेरी गंगा माईं......

ब्रम्ह कमंडल सु गंगा निकली,

हरि की पेढी आयी जी,

हरि की पेढी आयी जी,

दोय कर जोड भगीरथ बोले,

दोय कर जोड भगीरथ बोले,

धिन धिन गंगा माई जी,

जाग जाग मेरी गंगा माईं......

दुनिया दर्शन आयी जी,

दुनिया दर्शन आयी जी,

जाग जाग मेरी गंगा माई,

जाग जाग मेरी गंगा माईं,

दुनिया दर्शन आयी जी,

जाग जाग मेरी गंगा माईं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।