मै तो हवा हूँ किस तरह पहरे लगाओगे

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॥ पावन पाठ ॥

( मेरा फन मेरी आवाज,

मेरे तेवर लेजा,

सब का सब अपनी ही,

जागीर समझकर लेजा,

और मैने अपने हाथो की लकीरे,

भी अब तुझे दे दी है,

गर ये भी रास ना आये तो,

फिर मेरा मुकद्दर लेजा। )

मै तो हवा हूँ किस तरह,

पहरे लगाओगे,

मै तो मै तो,

मैं तो हवा हूँ किस तरह,

पहरे लगाओगे,

अजी मैं तो हवा हूँ किस तरह,

पहरे लगाओगे,

महसूस ही करोगे मुझे,

छू ना पाओगे,

मैं तो हवा हू किस तरह,

पहरे लगाओगे.......

हम ना रहेंगे एक दिन,

ऐसा भी आएगा,

हम ना रहेंगे एक दिन,

ऐसा भी आएगा,

तस्वीर को गले से मेरी,

तुम लगाओगे,

तस्वीर को गले से मेरी,

तुम लगाओगे,

मैं तो हवा हू किस तरह,

पहरे लगाओगे......

कागज के इस लिबास को,

बदन से उतार दो,

कागज के इस लिबास को,

बदन से उतार दो,

पानी बरस गया तो किसे,

मुँह दिखाओगे,

पानी बरस गया तो किसे,

मुँह दिखाओगे,

मैं तो हवा हू किस तरह,

पहरे लगाओगे......

गम क्यूँ किसी गरीब का,

हँसते हो देखकर,

गम क्यूँ किसी गरीब का,

हँसते हो देखकर,

करवट जो क़्क्त लेगा तो,

सब भूल जाओगे,

करवट जो क़्क्त लेगा तो,

सब भूल जाओगे,

मैं तो हवा हू किस तरह,

पहरे लगाओगे......

ऐ दोस्त मेरी याद तुम्हे,

आएगी बहुत,

ऐ दोस्त मेरी याद तुम्हे,

आएगी बहुत,

मेरी गजल को जब कभी,

गुनगुनाओगे,

मेरी गजल को जब कभी,

गुनगुनाओगे,

मैं तो हवा हू किस तरह,

पहरे लगाओगे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।