मेरा तार हरी से जोड़े ऐसा कोई संत मिले

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

मेरा तार हरी से जोड़े,

ऐसा कोई संत मिले......

टुटा तार हुआ अँधियारा,

हरि दिखे ना हरी का द्वारा,

मेरा बिछड़ा मीत मिला दे,

ऐसा कोई संत मिले,

मेरा तार हरी से जोड़े,

ऐसा कोई संत मिले......

जोड़े तार करे उजियारा,

अंतर में ना रहे अँधियारा,

मेरा आतम रूप लखा दे,

ऐसा कोई संत मिले,

मेरा तार हरी से जोड़ें,

ऐसा कोई संत मिले......

जब मैं अटकू जब मैं भटकु,

हरि के मिलन को जब में तड़पुं,

मेरी बाह पकड़ के मिला दे,

ऐसा कोई संत मिले,

मेरा तार हरी से जोड़ें,

ऐसा कोई संत मिले......

हँसा हस कर जाए हमारा,

माया जाल ना फसे बिचारा,

मेरे हंस को मोती चुगा दे,

ऐसा कोई संत मिले,

मेरा तार हरी से जोड़ें,

ऐसा कोई संत मिले......

निज में निज का बोध करा दे,

हरे पाप हरिहर से मिला दे,

मेरी सीधी बात करा दे,

ऐसा कोई संत मिले,

मेरा तार हरी से जोड़ें,

ऐसा कोई संत मिले.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।