भोले तेरी कृपा से युग आते युग जाते है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( शिव समान दाता नहीं, विपती विदारण हार,

लज्जा मोरी राखियो, शिव नंदी के असवार॥ )

भोले तेरी कृपा से युग आते युग जाते है,

युगो युगों से ब्रम्हा विष्णु हे शिव तेरे गुण गाते है,

भोले तेरी कृपा से युग आते.....

शिव नाम प्यारा मेरा शिव नाम प्यारा,

सबसे है न्यारा मेरा मेरा शिव नाम प्यारा....

हर युग का तू रचैता है,

हर पल तू संग रहता है,

कर्मो का फल तू देता है,

बदले में कुछ न लेता है,

ओ भोले सबसे निराले तेरे काम हां काम रे,

भोले तेरी कृपा से युग आते.....

जीवन तो बहती धारा है,

धारा का तू किनारा है,

जन्मों का संगी साथी हैं,

तू ही पिता हमारा हैं,

ओ भोले सबसे बड़ा है तेरा नाम हां नाम रे,

भोले तेरी कृपा से युग आते.....

तेरे नाम का उच्चारण है,

मुक्ति तू ही निवारण है,

आदी पुरुष शम्भू है,

सृष्टि का करता कारण है,

ओ भोले जपते तुझे सुबह शाम हां शाम रे,

भोले तेरी कृपा से युग आते.....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।