हे शिव शंकर हे करुणाकर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे शिव शंकर हे करुणाकर हे परमेश्वर परम पिता,

हर हर भोले नमः शिवाय, नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय,

हे शिव शंकर हे करुणाकर....

हे शिव शम्भू संकट हरता,

विघ्न विनाशी मंगल करता,

जिस पर होवे कृपा तुम्हारी,

पल में विपदा दूर हो सारी,

तुम सुख सागर जगदीश्वर,

हे शिव शंकर हे करुणाकर......

देवादी देव जय महा देवा,

सुर नर मुनि सब करते सेवा,

नमः शिवाय मंत्र पंच अक्षर,

जिसने जपा खुश हो गए उस पर,

तुम हो दयालु हे भोलेश्वर,

हे शिव शंकर हे करुणाकर......

बम बम भोले डमरू बोले,

तुमने द्वार दया के खोले,

जो भी आया शरण तुम्हारी,

रक्षक बन गए तुम त्रिपुरारी,

त्रिशूल धर हे महाकालेश्वर,

हे शिव शंकर हे करुणाकर......

ब्रम्हा विष्णु ध्यान लगावे,

वेद पुराण शास्त्र यश गावे,

गिरिजा पति अनंत अविनाशी,

आनंद दाता विश्व प्रकाशी,

तुम सर्वेश्वर हे सोमेश्वर,

हे शिव शंकर हे करुणाकर......

पूजन किए श्री राम तुम्हारा,

लंका जीती रावण मारा,

दीनानाथ प्रभु सुख दाता,

औढर दानी भाग्य विधाता,

तुम रामेश्वर हे भक्तेश्वर,

हे शिव शंकर हे करुणाकर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।