खाली ना द्वारे उतो मोड़ दतिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खाली ना दवारे उतों मोड़ दतिए मेरा होर ना,

मेरा होर ना मैया मेरा होर ना,

तेरे हथ जिन्दगी दी डोर दातिये मेरा होर ना....

दर उते भगत अजीब आ गया,

करमा दा मारा माँ गरीब आ गया,

डूबी जांदा दिल कमजोर दातीए मेरा होर ना,

खाली ना दवारे उतो मोड़ दातिए मेरा होर ना.....

लोकी कैंदे मेतो महामाई रूस गई,

दिल मेरा आखदा खुदाई रूस गई,

डूबी जांदा दिल कमजोर दातिए मेरा होर ना,

खाली ना दवारे उतो मोड़ दातिए मेरा होर ना.....

देख़ लै द्वारें उते रोन अखियां,

हन्जुआ दे हार पिरोन अखियाँ,

केहड़ी गलो होइ ए कठोर दातिए मेरा होर ना,

खाली ना दवारे उतो मोड़ दातिए मेरा होर ना.....

दुनिया ने अज तेरा भ़ेद जानना,

किवे तेरी ज्योत ने लुकाया चानना,

डूबी जांदा दिल कमजोर दातिए मेरा होर ना,

खाली ना दवारे उतो मोड़ दातिए मेरा होर ना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।