जय जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन शनि देव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी,

सूर्य पुत्र प्रभु छाया महातारी ,

जय जय जय शनि देव.....

श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी,

नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी,

जय जय जय शनि देव.....

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी,

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी,

जय जय जय शनि देव.....

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी,

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी,

जय जय जय शनि देव.....

देव दनुज ऋषि मुनी सुमीरत नर नारी,

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण है तुम्हारी,

जय जय जय शनि देव......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।