वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ना मंदिर में रहता ना रहता मकान में,

वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में......

हीरे की माला ना फूलों की माला,

अपने गले में है सर्पों को डाला,

रहता फक्कड़ देव हमने देखा ना जहान में,

वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में......

न तन पर है कुर्ता न तन पर है धोती,

सारे बदन पर है एक लंगोटी,

गंगा सिर पर ना होवे तो आवे ना पहचान में,

वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में......

ना खाए मेवा ना खाए मिठाई,

भांग के नशे में तूने जिंदगी बिताई,

जिसने जो भी मांगा तूने दे दिया दान में

वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में......

ऐसा है देव जो भी मांगो मिलेगा,

जटाधारी बोल दे जो वो ना टलेगा,

ऐसा चमत्कार भोले तेरी है जुबान में,

वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।