सारा योगी बने संसार जगत में कोई ना हो बिमार

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॥ पावन पाठ ॥

सारा योगी बने संसार, जगत में कोई ना हो बीमार,

योग का हो विस्तार, जीवन सारा तर जाएगा....

क्लेशों की गठरी ने मन को था घेरा,

आठों घड़ी अब है योग का पहरा,

मेरा होनें लगा उद्धार, जीवन सारा तर जाएगा,

सारा योगी बने संसार.....

समता है यही योग का गहना,

इसको है जिसने भी पहना,

नहीं लागे कोई हार, जीवन सारा तर जाएगा,

सारा योगी बने संसार.....

सम्यक सेवन मन शुद्ध अपना,

निरोगी काया मन ॐ जपना,

है योग का ये ही सार, जीवन सारा तर जाएगा,

सारा योगी बने संसार.....

पूज्या साध्वी देवस्वधा जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।