तुम अन्धेरे में ज्योति मेरी नैया के मांझी

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तुम अन्धेरे में ज्योति, मेरी नैया के मांझी

जीवन सम्भालो हमारा ओ कृपा सिंधु.....

तेरे आशीषों का अन्त न पाया,

आतुर दर्शन तुम्हरे हो कृपा सिंधु,

जीवन सम्भालो हमारा.......

भावों की मेरी हो अन्तरवीणा,

मानस संगीत तुमसे ओ कृपा सिंधु,

जीवन सम्भालो हमारा.......

कस्ती तू ही है मेरा किनारा,

शोभित जीवन तुझसे ओ कृपा सिंधु,

जीवन सम्भालो हमारा.......

हारे विभ्रष्टों के पथदर्शी,

संकट मोचन सगरे श्री कृपा सिंधु,

जीवन सम्भालो हमारा.......

मेरे प्रश्नों का उत्तर तू है,

जीवन आशय सबके औ कृपा सिंधु,

जीवन सम्भालो हमारा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।