तेरे प्रीत से सिंचित है ये मेरा जीवन प्राण

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे प्रीत से सिंचित है ये मेरा जीवन प्राण,

शाश्वत निर्मल निर्झर है ममता का दूजा नाम,

तेरी महिमा तो जग में सबसे महान,

तुझे पाके जाना मुझको मिला वो भगवान......

सागर से भी गहरा तेरा प्रेम है अम्बर से भी उन्नत है,

चंदा और सूरज से स्वामी प्रेम तेरा हाँ उज्ज्वल है,

तेरे आशीष के जल में नित चलती है मेरी नाव,

तुम ही तो आकाश बनके करते उसपर छाँव,

तेरी महिमा तो जग में सबसे महान,

तुझे पाके जाना मुझको मिला वो भगवान......

इदन्न मम का तेरा व्यवहार है कर्मठता के मूरत है,

जीवन ये तेरा समदर्शी गंगा से भी पावन है,

अन्धियारी गलियों में लाई नई भोर करुणा की तेरी किरणें,

दर्शन से तेरे स्वामी हर्षित मन हैं सबके,

तेरी महिमा तो जग में सबसे महान,

तुझे पाके जाना मुझको मिला वो भगवान्.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।