आरती करो हरिहर की करो

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आरती करो हरिहर की करो,

नटवर की,

भोले शंकर की,

आरती करो शंकर की.....

सिर पर शशि का मुकुट संवारे,

तारों की पायल झनकारे,

धरती अम्बर डोले तांडव,

लीला से नटवर की,

आरती करो शंकर की,

आरती करो हरि-हर की करो,

नटवर की,

भोले शंकर की,

आरती करो शंकर की.....

फणि का हार पहनने वाले,

शम्भू है जग के रखवाले,

सकल चराचर अगजग नाचे,

ऊँगली पर विषधर की,

आरती करो शंकर की,

आरती करो हरि-हर की करो,

नटवर की,

भोले शंकर की,

आरती करो शंकर की....

महादेव जय जय शिवशंकर,

जय गंगाधर जय डमरूधर,

हे देवो के देव मिटाओ,

तुम विपदा घर घर की,

आरती करो शंकर की,

आरती करो हरि-हर की करो,

नटवर की,

भोले शंकर की,

आरती करो शंकर की....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।