मानो तो वो शिव शंकर है

लखबीर सिंह लक्खा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – मानो तो मैं गंगा माँ हूँ

मानो तो वो शिव शंकर है,

ना मानो तो पथ्थर प्राणी,

विश्वास है जिनके मन में,

मिलते है उसे शिव दानी,

मानो तो वो शिव शंकर है,

ना मानो तो पत्थर प्राणी.....

युग युग से सब जपते आये,

जिनके नाम की माला,

स्वयं है बैठा ज्योतिर्लिंग में,

शंकर डमरू वाला,

सब वेद पुराण बताते,

शिवलिंग की अमर कहानी,

मानो तो वो शिव-शंकर है,

ना मानो तो पत्थर प्राणी......

नर नारी क्या देवी देव भी,

आकर शीश नवाते,

भोले की परिकर्मा करके,

हर हर बम बम गाते,

जिनके चरणों की सेवा,

करती गौरा महाराणी,

मानो तो वो शिव-शंकर है,

ना मानो तो पत्थर प्राणी......

श्री राम प्रभु भी आकर,

चरणों में फूल चढ़ाये,

इस पथ्थर की पूजा कर वो,

मन वांछित फल पाए,

लंका जीती और मारे,

रावण जैसे अभिमानी,

मानो तो वो शिव-शंकर है,

ना मानो तो पत्थर प्राणी......

डमरू वाले की चौखट पर,

कोई भी प्राणी आये,

सच्चे मन से बस एक लौटा,

गंगाजल का चढ़ाये,

शर्मा कट जाती उसकी,

जीवन भर की परेशानी,

मानो तो वो शिव-शंकर है,

ना मानो तो पत्थर प्राणी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।