फिर से सावन की रुत आई

लखबीर सिंह लक्खा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – ये गलियां ये चौबारा

फिर से सावन की रुत आई,

मौका चूक ना जाना भाई,

दरबार में भोले शंकर के,

गंगा जल भरके चलो,

बम बम रटते चलो.....

वो ही कांवर उठाकर आते,

मेरे भोले जिसको बुलाते,

शिव शंकर की बात निराली,

कोई दर से लौटा ना खाली,

जिसने प्रेम से नाम लिया है,

भोले शंकर ने क्या ना दिया है,

ना कोई भोले जैसा दानी,

ना कोई भोले जैसा ज्ञानी,

परिवार में भोले शंकर के,

गंगा जल भरके चलो,

बम बम रटते चलो.....

जिसपे भक्ति का रन्ग चढ़ा है,

इस दुनिया में वो ही बड़ा है,

भोले बाबा की की जिसने भक्ति,

उसका काम ना कोई अड़ा है,

देख एक बार कांवड़ उठा के,

और मन से तू बम बम गाके,

भोले बाबा को मनालो,

फिर जो चाहो वो ही पालो,

दरबार में भोले शंकर के,

गंगा जल भरके चलो,

बम बम रटते चलो......

शिव है दाता है और जग है भिखारी,

कहलाते है वो त्रिपुरारी,

उनके दर की है अद्भुत माया,

मेने क्या भी बाबा से पाया,

चलो छोड़ो अब जग के झमेले,

भरके गागर अब काँधे पे लेले,

लख्खा राज की बात बताता,

महिमा कावड़ की सुनाता,

दरबार में भोले शंकर के,

गंगा जल भरके चलो,

बम बम रटते चलो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।