तीन बार भोजन भजन इक बार उसमे भी आते है विघन हजार

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – सावन का महीना

तीन बार भोजन,

भजन इक बार,

उसमे भी आते है,

विघन हजार.....

मन करता है मैं,

गंगा नहाऊँ,

गंगा नहाऊँ,

में जमुना नहाऊँ,

गंगा जाते जाते मुझको,

आ गया बुखार,

उसमे भी आते है,

विघन हजार.....

मन करता है मैं,

दर्शन को जाऊँ,

दर्शन को जाऊँ मैं,

माला जप आऊँ,

माला जपते जपते देखो,

आ गए रिश्तेदार,

उसमे भी आते है,

विघन हजार.....

मन करता है मैं,

दान कर आऊँ,

दान कर आऊँ मैं,

धरम कर आऊँ,

बड़ा है परिवार,

देता ना कोई उधार,

उसमे भी आते है,

विघन हजार......

मन करता है मैं,

कथा सुन आऊँ,

कथा सुन आऊँ में,

गीता पढ़ आऊँ,

गीता पढ़ते पढ़ते,

नींद आ गई कई बार,

उसमे भी आते है,

विघन हजार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।