सांवरा थारी माया रो पायो कोनी पार

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( सांवरा ने ढूंढन में गई , कर जोगन रो वेश,

ढूंढत ढूंढत जुग भया, आया धोला केश॥ )

संवारा थारी माया रो,

पायो कोनी पार,

भेद कोनी जाणु वो,

दयालु दीना नाथ....

गव रा जाया बेलिया,

कमावे दिन ने रात,

बूढ़ा कर के बेचे रे,

दयालु दीना नाथ,

संवारा थारी......

इन्दर कोप कियो ब्रज ऊपर,

बरसियो मूसलधार,

नख पर गिरधर धरियो वो,

दयालु दीना नाथ,

संवारा थारी......

हिरना कस्यप प्रह्लाद ने बरज्यो,

बरज्यो बारम्बार,

राम नाम नहीं लेणा वो,

दयालु दीना नाथ,

संवारा थारी......

विष रा प्याला राणो भेजिया,

दीज्यो मीरा ने जाय,

विष अमृत कर डालियो वो,

दयालु दीना नाथ,

संवारा थारी......

बाई मीरा री अरज विनती,

सुण ज्यो सिर्जन हार,

में चरणा री दासी वो,

दयालु दीना नाथ,

संवारा थारी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।