पावागढ़ वाली मैया प्यारी दया करो

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पावागढ़ वाली मैया प्यारी,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.....

ॐ नमो महाकाली रूपम,

शक्ति तू ज्योत स्वरूपम रे,

पावागढ़ वाली मैया प्यारी,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

शुंभ निशूंभ को तुमने मारा,

रक्तबीज को संहरा रे,

दुष्टों को संहारने वाली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

सूरज चंदा मे रूप समाया,

तारों का रूप तू प्यारा रे,

भक्तो के दुख हरने वाली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

तेरे रूप की देख ज्वाला,

डाकिन भी डर जाती रे,

संत गुणी जन तुमको पूजे,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

दक्ष के कुण्ड मे तू समाकर,

पार्वती बन आई रे,

महिमा तेरी बड़ी निराली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

कलकत्ते मे तू काली माँ,

जय जगजननी ज्वाला रे,

आओ माँ आओ भक्त पुकारे,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.....

अखंड ज्योत तुम्हारी है मैया,

सारे ग्रहो को सुधारे रे,

लाज रखो हे पावागढ़ वाली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

हाथ तू सिर पे रख दे मैया,

तुझसा ना कोइ न्यरारा रे,

हे ब्रम्हाणी हे कल्याणी,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.....

विद्या रूप तू विश्व विधाता,

माँ काली मेरी माता रे,

भक्तो पर माँ मेहर तुम्हारी,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

कोई मंत्र तंत्र नही चले उसपे,

जो माँ तेरे सहारे रे,

वार करे तू बिसो भुजा से,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

हरा एक खोटा कर्म हटावे,

भारी दुख मिटावे रे,

शरन मे तेरी माँ हम आए,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

तेरे कृपा की किरणे मैया,

हमको शक्ति देती रे,

शरण में आए तेरे सवाली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.....

हम अज्ञानी है संसारी,

मोह माया मे उलझे रे,

हमरे मोह के बंधन काटो,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

शेष महेश तेरे गुण गावे,

ब्रम्‍हा पार ना पावे रे,

विष्णु जी करे प्राथना तेरी,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

तारणहारी तारो हमको,

पाप हमारे मिटाओ रे,

रहम करो हे माँ रखवाली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

अंग पीड़ा और रोग ना आवे,

जो तेरे गुणगावे रे,

भक्तो की भव बाधा हरणी,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.......

भुत प्रेत तेरे नाम से भागे,

संकट कभी ना आए रे,

मैया पार लगाने वाली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.......

पूजा पाठ की विधि ना जानू,

विश्वम्भर क्या बखानू रे,

दर्शन देदो दीनदयाली,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.....

मंत्र तंत्र को मैं ना जानू,

मैया पढूं चालीसा रे,

जीवन में माँ करना उजाला,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे........

बिच भंवर में फसी है नैया,

आकर लाज बचाना रे,

सद्बुद्धि का दान ही देना,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे......

ॐ नमो महाकाली रूपम,

शक्ति तू ज्योत स्वरूपम रे,

पावागढ़ वाली मैया प्यारी,

दया करो महाकाली रे,

दया करो महाकाली रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।