कन्हैया हमारा गुजारा ना होता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – हमें और जीने की चाहत

कन्हैया हमारा गुजारा ना होता,

अगर तुम ना होते,

अगर तुम ना होते......

मुसीबत में आया बनकर ये माझी,

बिन पानी के नैया चला दी,

मुसीबत में आया बनकर ये माझी,

बिन पानी के नैया चला दी,

वर्ना मैं कैसे, चैन से सोता,

अगर तुम ना होते,

अगर तुम ना होते......

माना ये आँसू अब भी निकलते,

कह रहें हों जैसे ये बहते बहते,

माना ये आँसू अब भी निकलते,

कह रहें हों जैसे ये बहते बहते,

बताओ मैं किसके, चरणों में रोता,

अगर तुम ना होते,

अगर तुम ना होते......

मेहरबानी के सिलसिले हैं जारी,

एहसान तेरा किरपा तुम्हारी,

मेहरबानी के सिलसिले हैं जारी,

एहसान तेरा किरपा तुम्हारी,

कहता ‘पवन’ के, हमारा क्या होता,

अगर तुम ना होते,

अगर तुम ना होते.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।