मेरे कंठ बसो महारानी-लख्खा

लखबीर सिंह लक्खा
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे कंठ बसो महारानी,

ना मैं जानू पूजा तेरी,

ना मैं जानू महिमा तेरी,

मैं मूरख अज्ञानी,

मेरे कंठ बसो महारानी....

सुर में ताल में लय और राग में,

तुम ही हो रागिनी माँ,

सात सुरो की हो वरदानी,

माँ शारदे वीणा वाणी,

मेरे कंठ बसो महारानी.....

ब्रम्हा जी की हो ब्रम्हाणी,

लक्ष्मी हो विष्णु प्रिया हो,

काली गौरी दुर्गा भी हो,

तुम हो शिव की शिवानी,

मेरे कंठ बसो महारानी......

जब भी गाउँ महिमा तुम्हारी,

ना बहकु ना भटकु,

लख्खा सुनाये प्रेम से सबको,

तेरी अमर कहानी,

मेरे कंठ बसो महारानी.....

मेरे कंठ बसो महारानी,

ना मैं जानू पूजा तेरी,

ना मैं जानू महिमा तेरी,

मैं मूरख अज्ञानी,

मेरे कंठ बसो महारानी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।